आज की पोस्ट में आप जानेंगे की CBSE Kya Hai यदि आप भी इसकी जानकारी प्राप्त करना चाहते है। तो आप बिल्कुल सही पोस्ट पढ़ रहे है। और आपको CBSE Ka Full Form भी जानने को मिलेगा। इस पोस्ट के जरिये आपको CBSE की पूरी जानकारी दी जाएगी।
ICSE Kya Hai यह भी आप इस पोस्ट के माध्यम से जानेंगे। तथा ICSE Ka Full Form भी आपको बताएँगे। और हम आपको यह बिल्कुल सरल भाषा में समझाएँगे। आशा करते है की आपको हमारी सभी पोस्ट पसंद आ रही होगी। और इसी तरह आप आगे भी हमारे ब्लॉग पर आने वाली सारी पोस्ट पसंद करते रहे।
क्या आप भी सीबीएसई और आईसीएसई के बीच का अंतर जानना चाहते है। और पता करना चाहते है की दोनों बोर्ड में क्या अंतर है। और दोनों बोर्ड में कौन Best है तो आप इस पोस्ट को ज़रुर पढ़े। आपके पास बोर्ड Select करने के बहुत से Option होते है। आप अपनी योग्यता के अनुसार बोर्ड का चयन कर सकते है।

CBSE और ICSE दोनों बोर्ड अपनी योग्यता के माध्यम से शिक्षा प्रदान करते है। तथा दोनों ही बोर्ड के द्वारा उच्च शिक्षा प्रदान की जाती है। लेकिन इन दोनों ही बोर्ड के कार्य करने में बहुत बड़ा अंतर होता है। जो आपको आज हम इस पोस्ट के द्वारा बताएँगे।
तो आइये दोस्तों अब जानते है State Board Kya Hai और इसकी पूरी जानकारी प्राप्त करने के लिए यह पोस्ट CBSE Kya Hai शुरू से अंत तक ज़रुर पढ़े। आपको इसकी पूरी जानकारी ज़रुर मिलेगी।

CBSE Kya Hai

CBSE भारत का एक शिक्षा बोर्ड है। यह राष्ट्रीय स्तर पर सभी प्राइवेट तथा पब्लिक स्कूल को संचालित करता है। इस बोर्ड को भारत सरकार के द्वारा नियंत्रित किया जाता है।

CBSE

तथा यह बोर्ड सभी केन्द्रीय विद्यालयों, जवाहर नवोदय विद्यालयों, तथा निजी विद्यालयों को मान्यता प्रदान करता है। भारत में 19 हजार से भी ज्यादा स्कूलों को CBSE की मान्यता प्राप्त है।

CBSE बोर्ड में विज्ञान और गणित के विषयों पर ज्यादा जोर दिया जाता है। तथा यह Ncert द्वारा मान्यता प्राप्त है। CBSE हर साल 10th और 12th की परीक्षा करवाती है।
तथा इन परीक्षाओ के अलावा Jee Main, Neet, आदि कुछ परीक्षाएं भी आयोजित करवाती है। इसके अलावा यह Aipmt – All India Pre Medical Test भी आयोजित करती है। यह परीक्षा Medical Colleges में प्रवेश लेने के लिए आयोजित की जाती है।

CBSE Full Form

Central Board Of Secondary Education

CBSE Full Form In Hindi

केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड

ICSE Kya Hai

ICSE की Exam Cisce(Indian School Certificate Examination) के द्वारा ली जाती है। CISCE एक NGO संस्था है। यह बोर्ड 12 Th Class तक की परीक्षा आयोजित करती है।

ICSE
तथा यह भारत में स्कूल शिक्षा का एक निजी, गैर सरकारी बोर्ड (Non Govermental Board) है। जो ICSE की परीक्षा को अंग्रेजी माध्यम के द्वारा आयोजित करती है।
इसे भारत में नई शिक्षा नीति (New Education Policy) 1986 की सिफारिशों को पूरा करने के लिए बनाया गया था। ICSE की परीक्षा सिर्फ अंग्रेजी में होती है। ICSE के Affiliated Colleges के नियमित छात्र ही यह परीक्षा दे सकते है। निजी छात्रों को यह परीक्षा देने की अनुमति नहीं दी जाती है।

ICSE Full Form

 Indian Certificate Of Secondary Education 

State Board Kya Hai

हर प्रदेश का अपना बोर्ड होता है। तथा यह दूसरे बोर्ड की अपेक्षा सरल माना जाता है। यह एक ऐसा Curriculum होता है, जो सभी प्रकार के छात्रों के लिए उचित रहता है। तथा आप इसकी परीक्षा में अच्छे Marks ला सकते है।
यदि कोई Student Sports भी Join करना चाहता है तो State Board लेने पर वह परीक्षा में अच्छे Marks ला सकता है। जो बच्चे Coaching Class पर भी ज्यादा फोकस करना चाहते है और परीक्षा में Marks भी अच्छे प्राप्त करना चाहते है उनके लिए यह बोर्ड सही रहता है।

ICSE और CBSE पाठ्यक्रम के बीच का अंतर

ICSE और CBSE में दोनों की सुविधाओं और कार्यो को करने में बहुत अंतर है। आपको नीचे इन्हीं अंतर के बारे में बताया गया है। आइये जानते है इन दोनों के बीच का अंतर की इन दोनों में क्या अंतर है।

  • चिकित्सा या इंजीनियरिंग परीक्षा

चिकित्सा या इंजीनियरिंग का अध्ययन करने की इच्छा रखने वाले लोगों के लिए CBSE बोर्ड ज्यादा उपयुक्त है।cbse के द्वारा Aieee की परीक्षा आयोजित की जाती है। लेकिन Icse इस परीक्षा को आयोजित नहीं करती है।

  • पर्यावरण विषय

ICSE में पर्यावरण विषय का अध्ययन अनिवार्य है। जबकि CBSE में पर्यावरण विषय का अध्ययन अनिवार्य नहीं है।

  • भाषा का माध्यम

ICSE केवल अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा प्रदान करती है। तथा CBSE अंग्रेजी और हिंदी दोनों माध्यम की शिक्षा प्रदान करती है। जिसमें Student 2 भाषाओँ में से किसी एक को चुन सकते है।

  • परीक्षा परिणाम

CBSE में छात्रों के ग्रेड के द्वारा परीक्षा परिणाम घोषित किया जाता है। जबकि Icse के द्वारा 2 तरह से परीक्षा परिणाम घोषित होते है। एक ग्रेड और दूसरा अंकों के द्वारा।

  • विषयों की संख्या में अंतर

अगर आप CBSE के छात्र है और आप 10th की बोर्ड परीक्षा दे रहे है। तो आपको सिर्फ 6 विषयों का ही अध्ययन करना होगा। और अगर आप Icse के छात्र है तो आपको 12 विषयों का अध्ययन करना होगा।

  • छात्रवृति का अंतर

CBSE छात्रवृति पर आधारित परीक्षाओं के अवसर प्रदान करती है। तथा छात्रों की प्रतिभाओं को सम्मानित करने की परीक्षाओं का अधिक अवसर देती है। जो विभिन्न विषयों या अपनी रूचि के लिए छात्रों को पुरस्कार देता है। Icse भी इस तरह की परीक्षा आयोजित करती है। लेकिन CBSE बोर्ड इन परीक्षाओं को अधिक तथा नियमित रूप से करवाता है।

CBSE और ICSE भारत के दो जाने माने बोर्ड हैं और इनको लेकर विद्यार्थियों और अभिभावकों के मन में अक्सर यह सवाल उठता है कि, “CBSE और ICSE बोर्ड में कौन सा बोर्ड बेहतर है?” या “एडमिशन के दौरान अपने बच्चे को किस बोर्ड में प्रवेश करना चाहिए?” इत्यादि.

यहाँ हमने कुछ शिक्षकों से बात कर के सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें बताई हैं.  इन्हे जानने और समझने के बाद आपको समझ आ जाएगा कि CBSE और ICSE बोर्ड में कौन सा बोर्ड बेहतर है या फिर आपको एडमिशन के समय कौन सा बोर्ड चुनना चाहिए.

1. CBSE बोर्ड में हिंदी और अंग्रेजी दोनों माध्यम से पढ़ाई होती है

CBSE बोर्ड में हिंदी और अंग्रेजी दोनों माध्यम से पढ़ाई होती है वहीं ICSE बोर्ड में सिर्फ अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई होती है. सीबीएसई बोर्ड से सम्बंधित स्कूलों में एनसीईआरटी किताबों के द्वारा पढ़ाई होती है. ये किताबें हिंदी, अंग्रेज़ी और उर्दू भाषा में उपलब्ध हैं.
ICSE बोर्ड से सम्बंधित ज़्यादातर स्कूलों में निजी प्रकाशकों की किताबें इस्तेमाल होती हैं जो अंग्रेज़ी में होती हैं और एनसीईआरटी द्वारा प्रकाशित किताबों की तुलना में महंगी होती हैं. चूंकि CBSE बोर्ड में हिंदी और अंग्रेजी दोनों माध्यम से पढ़ाई होती है इसलिए इस मामले CBSE बोर्ड कई विद्यार्थियों की पहली पसंद है. 

2. अभिभावकों की नौकरी और बच्चों की पढ़ाई

नौकरीपेशा वाले बहुत से अभिभावक ऐसे होते हैं जिनका ट्रांसफर एक जगह से दूसरी जगह होता रहता है और इसी कारण से बच्चों का स्कूल भी बदलता रहता है. CBSE बोर्ड की अगर बात करें तो इससे सम्बंधित लगभग हर स्कूल में NCERT किताबें और सिलेबस फॉलो होती है. ऐसे में अगर विधार्थी स्कूल बदलता है तो उस पर ज़्यादा दबाव नहीं पड़ता क्यूंकि वह किताबें और सिलेबस से परिचित होता है.

वहीं ICSE बोर्ड की अगर बात करें तो इससे विभिन्न स्कूलों में विभिन्न प्रकाशकों की किताबें फॉलो होती हैं. ऐसे में विद्यार्थियों को नई किताबें और नए सिलेबस से तालमेल बैठाने में समय लगता है और इस वजह से उन पर ज़्यादा दबाव पड़ता है.

3. करियर के मामले में: CBSE vs ICSE

ICSE बोर्ड का सिलेबस Cambridge School (United Kingdom) से प्रेरित है जहा इंग्लिश जैसे विषय में काफी ज़ोर दिया जाता है और भविष्य में जो विद्यार्थी IELTS और TOEFL जैसी परीक्षाएं देना चाहते हैं उनके लिए इस बोर्ड से पढ़ाई करना बहुत फायदेमन्द होता है. ICSE बोर्ड अंग्रेजी, कला और विज्ञान सभी विषयों को समान प्राथमिकता देता है.

वहीँ दूसरी ओर CBSE बोर्ड से सम्बंधित स्कूलों में NCERT किताबें फॉलो होती हैं. भारत के ज़्यादातर इंजीनियरिंग और मेडिकल एंट्रेंस एग्ज़ाम्स का सिलेबस NCERT के सिलेबस पर आधारित होता है. NEET, JEE Main, UPSEE, WBJEE जैसी प्रतियोगी परीक्षाओ का सिलेबस आपको 11वीं और 12वीं की NCERT किताबों में मिल जाएगा.

इसलिए जो विद्यार्थी भविष्य में इंजीनियरिंग या मेडिकल एंट्रेंस एग्ज़ाम्स देने की योजना बना रहें हैं तो उनके लिए CBSE बोर्ड से पढ़ाई करना ज़्यादा फायदेमंद है.

4. सिलेबस के मामले में CBSE vs ICSE

Permission denied

CBSE बोर्ड की तुलना में ICSE बोर्ड का पाठ्यक्रम थोड़ा ज़्यादा है. ICSE बोर्ड में अंग्रेजी विषय के दो पेपर होते हैं, वहीं CBSE बोर्ड में केवल एक पेपर होता है. ICSE बोर्ड में विज्ञान विषय के तीन पेपर (भौतिकी, रसायन विज्ञान और जीवविज्ञान) होते हैं वहीं CBSE में विज्ञान विषय का केवल एक पेपर होता है.

CBSE सिलेबस लगभग हर साल अपडेट होता है उसमे कुछ न कुछ नए टॉपिक्स जोड़े जाते हैं. अभी इसी साल CBSE सिलेबस में GST से जुड़े टॉपिक्स जोड़े गए हैं. ICSE बोर्ड का सिलेबस भी अपडेट होता है लेकिन CBSE की तरह हर साल नहीं.

5. प्राइवेट कैंडिडेट्स और स्टेट बोर्ड के विद्यार्थी

प्राइवेट कैंडिडेट्स और स्टेट बोर्ड के विद्यार्थी जिन्होंने सीबीएसई स्कूलों से पढ़ाई नहीं की, CBSE बोर्ड ऐसे विद्यार्थियों को परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दे देता है. लेकिन ICSE ऐसे विद्यार्थियों को परीक्षाओं में बैठने की अनुमति नहीं देता.

तो ये थी CBSE और ICSE बोर्ड से जुडी कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां. इन्हे पढ़कर आप समझ गए होंगे कि कौन सा बोर्ड आपके लिए बेहतर होगा. किसी भी स्कूल में एडमिशन से पहले वहाँ के अध्यपकों से अपनी समस्याओं के  बारे में ज़रूर चर्चा करें.

कई छात्र, अभिभावक और शिक्षक इस विषय में हमेशा ऐसे प्रश्न पूछते हैं कि “छात्रों के लिए कौन सा बोर्ड बेहतर माना जाता है? आईसीएसई या सीबीएसई” या “एनआईओएस क्या है?”  इस विषय में काफी लोगों को कई प्रकार की दुविधा भी होती है. आज इस लेख में हम छात्रों के प्रश्नों की पुष्टि के साथ-साथ इन बोर्ड के बीच के महत्वपूर्ण अंतर के बारे में भी बतायेंगे:

सबसे पहले, हम तीनो बोर्डों के बारे में कुछ बुनियादी तथ्यों को समझेंगे:

सीबीएसई (माध्यमिक शिक्षा बोर्ड):

CBSE बोर्ड भारत का एक मात्र बोर्ड है जो की नेशनल लेवल पर सभी पब्लिक तथा प्राइवेट स्कूलस को संचालित करता है. यह बोर्ड भारत सरकार द्वारा नियंत्रित किया जाता है.

सीबीएसई सभी केन्द्रीय विद्यालयों (के वी एस), जवाहर नवोदय विद्यालयों (जे एन वी), प्राइवेट स्कूलों और भारत सरकार द्वारा अनुमोदित अधिकांश स्कूलों को affiliation प्रदान करता है .

भारत में 19 हजार से अधिक स्कूल और 25 विदेशी देशों में लगभग 211 स्कूल सीबीएसई से affiliated हैं.

सीबीएसई हर साल कक्षा 10वीं और कक्षा 12वीं की वार्षिक परीक्षा (या बोर्ड परीक्षा) आयोजित करती है और मई के अंत तक परिणाम की घोषणा भी कर देती है.

कक्षा 10वीं और कक्षा 12वीं के लिए बोर्ड परीक्षाओं के अलावा, सीबीएसई जेईई मेन, NEET, यूजीसी नेट इत्यादि जैसी कुछ महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाएं भी आयोजित करती है.

सीबीएसई अपने affiliated स्कूलों में एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तकें निर्धारित करती है.

सीआईएससीई / आईसीएसई (काउंसिल फॉर दा इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन):

इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट परीक्षा परिषद (CISCE) भारत में स्कूल शिक्षा की एक निजी तौर पर आयोजित राष्ट्रीय स्तर की बोर्ड है.

यह इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट ऑफ़ सेकेंडरी एजुकेश (ICSE or Class 10) और इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन (ISC or Class 12) को आयोजित करती है और मई के अंत तक परिणाम भी घोषित कर देती है.

भारत और विदेशों में लगभग 2,100 स्कूल सीआईएससीई से affiliated हैं.

CISCE परीक्षा का पाठ्यक्रम विदेशी कैम्ब्रिज स्कूल सर्टिफिकेट परीक्षा (यूनाइटेड किंगडम) के पाठ्यक्रम पर आधारित है.

पब्लिक एग्जामिनेशन अप्रैल-मई और अक्टूबर-नवंबर के महीने में आयोजित की जाती है.

कोई भी छात्र उन विषयों के लिए कक्षा 10वीं और 12वीं स्तर पर ऑन डिमांड परीक्षाओं के माध्यम से उपस्थित होने के लिए पात्र है, जिसमें उम्मीदवारों ने सब्जेक्ट वाइज शिक्षा के लिए एनआईओएस में प्रवेश लिया है.

परीक्षाओं की अंतिम तिथि के 6 सप्ताह बाद पब्लिक एग्जामिनेशन के परिणाम घोषित किए जाते हैं.

अब तक आपको यह अनुमान हो गया होगा कि तीनों बोर्डों की मान्यता बराबर है. इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कोई छात्र सीबीएसई या सीआईएससीई या फिर एनआईओएस से कक्षा 10 तथा 12वीं उत्तिर्ण है.

जब ऊपर वर्णित सभी तीन बोर्डों की मान्यता बराबर है तो किस बोर्ड को प्राथमिकता दी जानी चाहिए?

इस प्रश्न का उत्तर इस बात पर निर्भर करता है कि कक्षा 12 के बाद आप किस प्रकार के करियर को चुनना चाहते हैं.

यदि कोई छात्र जेईई मेन, NEET इत्यादि जैसे प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उपस्थित होने की योजना बना रहा है, तो उस छात्र को सीबीएसई बोर्ड चुनना चाहिए क्योंकि इस बोर्ड के पाठ्यक्रम पर ही JEE Main, NEET , WBJEE आदि की प्रतियोगी परीक्षा का पाठ्यक्रम आधारित होता है.

यदि कोई छात्र IELTS या TOEFL, जैसे English proficiency test के लिए उपस्थित होने की योजना बना रहा है, तो छात्र को CISCE बोर्ड का चयन करना चाहिए, क्योंकि CISCE पाठ्यक्रम भारत का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपयुक्त पाठ्यक्रम माना जाता है.

अगर किसी कारण से कोई छात्र किसी भी स्कूल में कक्षाओं में भाग लेने में असमर्थ है तो वह एनआईओएस से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी कर सकता है.

संक्षेप में, सभी तीन बोर्ड (सीबीएसई, एनआईओएस और सीआईएससीई) की समान मान्यता है और छात्र अपनी आवश्यकताओं और सुविधा के अनुसार बोर्ड का चयन कर सकते हैं.

PSEB

पंजाब बोर्ड (Punjab Board) जल्द ही 12वीं की परीक्षा का रिजल्ट (PSEB 12th Result 2019) जारी कर देगा. पंजाब बोर्ड के एक अधिकारी ने NDTV से बातचीत में कहा,”पंजाब बोर्ड की 12वीं का रिजल्ट (PSEB Result 2019) 14 या 15 मई को जारी कर दिया जाएगा.” 12वीं की परीक्षा का रिजल्ट (Punjab Board 12th Result) प्रेस कांफ्रेंस कर जारी होगा. स्टूडेंट्स का रिजल्ट (PSEB Class 12 Result) बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट pseb.ac.in पर जारी किया जाएगा.  स्टूडेंट्स इस वेबसाइट पर आसानी से अपना रिजल्ट देख पाएंगे. स्टूडेंट्स को रिजल्ट चेक करने के लिए रोल नंबर सबमिट करना होगा. पंजाब बोर्ड ने 1 मार्च से 29 मार्च, 2019 तक कक्षा 12 की परीक्षाएं आयोजित की थीं.इस साल करीब 3.40 लाख स्टूडेंट्स ने 12वीं की परीक्षा दी थी. बता दें कि 10वीं की परीक्षा का रिजल्ट बोर्ड पहले ही जारी कर चुका है. पंजाब बोर्ड ने 10वीं की परीक्षा का रिजल्ट 8 मई को जारी किया था. 10वीं की परीक्षा में लुधियाना की नेहा वर्मा ने टॉप किया है, उन्हें 99.54% मार्क्स मिलें हैं. आपको बता दें कि 2018 में कक्षा 10 की परीक्षा में 59.47% स्टूडेंट्स पास हुए थे, वहीं कक्षा 12वीं में 65.9% स्टूडेंट्स पास हुए थे. 

स्टूडेंट्स नीचे दिए गए स्टेप्स को फॉलों कर आसानी से अपना रिजल्ट चेक कर पाएंगे.

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ ओपन स्कूलिंग का उद्देश्य समाज के ग्रामीण या पिछड़े वर्ग के बच्चो व युवाओं को शिक्षा प्रदान करवाना हैं. NIOS बोर्ड सेकेंडरी, सीनियर सेकेंडरी व वोकेशनल courses प्रदान करता है साथ ही यह अन्य बोर्ड एग्जामिनेशन में फेल हुए छात्रों को ऑन-डिमांड एग्जामिनेशन की सुविधा देता है. यहाँ पढ़िये और जानिए NIOS बोर्ड के बारें में.

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ ओपन स्कूलिंग (NIOS) भारत का एकमात्र मंच है जहां ऐसें छात्र एडमिशन लेते हैं जो शिक्षा निजी मोड में पूरी करना चाहते हैं. NIOS बोर्ड के माध्यम से छात्र अपनी शिक्षा पूरी कर बाकी शिक्षा बोर्ड के छात्रों की तरह अपनी आगे की पढाई कर सकते है और अपना करियर बना सकते है. NIOS बोर्ड, मानव संसाधन विकास मंत्रालय (MHRD) द्वारा शुरू किया गया था, जिसका लक्ष्य समाज के ग्रामीण या पिछड़े वर्ग के बच्चो व युवाओं को शिक्षा प्रदान करना था जो स्कूलों के बिना ही सीख और पढ़ सकते हैं.

NIOS  के प्रमुख उद्देश्य क्या हैं?

  • देश के ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों को औपचारिक शिक्षा प्रदान करने के लिए जहां स्कूलों की सुविधा नहीं है.
  • ऐसे व्यक्तियों को शिक्षा प्रदान करना जो अपनी बुनियादी शिक्षा पूरी नहीं कर सके.
  • जो स्टूडेंट्स कक्षा 10 या कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षा (जो किसी भी अन्य बोर्ड से की हो) में असफल रह गए हो, वे एनआईओएस (NIOS) की ऑन-डिमांड परीक्षा की सुविधा के साथ उसी साल में अपनी कक्षा 10 या कक्षा 12 पूरी कर सकती है.

क्या एनआईओएस एक वैश्विक बोर्ड है?

NIOS बोर्ड भारत में 21 क्षेत्रीय केंद्रों और 4 उप केंद्रों के द्वारा संचालन करता है और साथ ही भारत में 6351 स्टडी सेंटरर्स व 31 स्टडी सेंटरर्स UAE, कुवैत, मस्कट, बहरीन, नेपाल, कतर और सऊदी अरब में संचालित है.

एनआईओएस के द्वारा स्टूडेंट्स कैसे पढ़ाई कर सकते हैं?

स्टूडेंट्स एनआईओएस से कक्षा 1 से लेकर कक्षा 8 तक की शिक्षा मूल रूप से पूरी कर सकते है. और इसके साथ-साथ कक्षा 10, कक्षा 12 या व्यावसायिक पाठ्यक्रमों (vocational courses) से अपनी शिक्षा पूरी कर सकते हैं.

माध्यमिक और वरिष्ठ माध्यमिक स्तर तक की शिक्षा के लिए, एनआईओएस छात्रों के लिए अपनी पसंद के पाठ्यक्रम, सीखने की गति, और सीबीएसई से अपने अंक ट्रान्सफर करवाने के लिए छात्रों के लिए सुविधा प्रदान करता है. यह सुविधा सभी अन्य राष्ट्रीय /राज्य स्कूल शिक्षा बोर्ड और राजकीय ओपन स्कूलों के लिए भी प्रदान करता है.

एनआईओएस एडमिशन 2018: ऑनलाइन और ऑफ़लाइन आवेदन प्रक्रिया, योग्यता:

स्टूडेंट्स National Institute of Open Schooling (NIOS) के द्वारा माध्यमिक (class 10), वरिष्ठ माध्यमिक (class 12) या vocational courses और basic education में admission ले सकतें हैं. इसके अलावा, जो छात्र कक्षा 10 वीं या 12 वीं में अन्य boards exams में असफल (fail) हो गयें हैं, वे NIOS board की ऑन-डिमांड परीक्षा (ODE) में प्रवेश लेकर, कभी भी class 10th या 12th boards exams में pass हों सकतें हैं.

NIOS board नए छात्रों के लिए हर साल प्रवेश प्रक्रिया दो बार उपलब्ध करता हैं क्यूकि यह open board साल में दो बार परीक्षा स्कीम फॉलो करता हैं. जो नए छात्र NIOS board में एडमिशन लेना चाहते हैं वो stream 1 में block I या block II में एडमिशन ले सकते सकते हैं.

NIOS: ट्यूटर marked असाइनमेंट

ट्यूटर मार्कड असाइनमेंट (टीएमए) कक्षा 10 या कक्षा 12 के स्तर पर नामांकित पाठ्यक्रम द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले एनआईओएस असाइनमेंट हैं. जिसके अंतर्गत छात्रों द्वारा चुने गए प्रत्येक विषय के लिए, तीन असाइनमेंट होंगे, प्रत्येक असाइनमेंट 6 प्रश्नों पर आधारित होगा. छात्रों को मूल्यांकन के लिए आवंटित मान्यता प्राप्त संस्थान (AI) में सभी असाइनमेंट को पूरा कर शिक्षकों/ट्यूटर/coordinators को जमा करना अनिवार्य है

एनआईओएस अन्य शिक्षा बोर्डों से अलग कैसे है?

एनआईओएस माध्यमिक, वरिष्ठ माध्यमिक और स्वैच्छिक शिक्षा के लिए एक ओपन बोर्ड के तौर पर छात्रों के लिए उपलब्ध है जबकि सीबीएसई, आईसीएसई और राज्य बोर्ड जैसे अन्य बोर्ड एक स्कूल सिस्टम का पालन करते हैं.

एनआईओएस 10वीं और 12वीं कक्षा में डिस्टेंस एजुकेशन कार्यक्रम प्रदान करके औपचारिक शिक्षा का विकल्प प्रदान करता है.

एनआईओएस के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न और उनके उत्तर:

NIOS  से पढ़ाई को लेकर विद्यार्थियों के मन में कई संशय (Doubt) रहते हैं. इन संशय को दूर करने के लिए विद्यार्थयों को कुछ महत्वपूर्ण सवाल और उनके जवाब हमने यहाँ उपलब्ध कराएं हैं. इनकी मददे से विद्यार्थियों को NIOS से जुड़े कई सवालों  के उत्तर मिल जाएंगे.

प्रश्न –1. एनआईओएस (NIOS) क्या है?

उत्तर: राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान या एनआईओएस (National Institute of Open Schooling or NIOS) एक शैक्षिक संगठन है जो मुक्त (Open) एवं दूरस्थ माध्यम (Distance learning) से शिक्षा प्रदान करता है और राष्ट्रीय बोर्डों यथा केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) तथा भारतीय स्कूल सर्टिफिकेट परीक्षा परिषद (Council for the Indian School Certificate Examination or CISCE) बोर्डों के समकक्ष स्तर पर पूर्व-स्नातक स्तर (pre-degree level) तक के लिए परीक्षाएं आयोजित करता है और प्रमाणपत्र भी प्रदान करता है.

प्रश्न –2. मुक्त एवं दूरस्थ (Open and Distance Learning or ODL) शिक्षा प्रणाली क्या है?

उत्तर: मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा (ओडीएल) स्व-अध्ययन सामग्री (एसएलएम) और शिक्षार्थियों की गति के आधार पर सुविधाजनक तरीके से शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने की प्रवर्तनकारी संकल्पना है. इस माध्यम में, शिक्षार्थी को एसएलएम (Self Learning Material) के अतिरिक्त पीसीपी (Personal Contract Programme) और टीएमए (Tutor Marked Assessment) के रूप में शैक्षिक सहायता भी उपलब्ध कराई जाती है.

प्रश्न –3. मुक्त विद्यालयी (Open Schooling) शिक्षा और नियमित विद्यालयी (Regular Schooling) शिक्षा व्यवस्था में क्या अंतर है?

उत्तर: नियमित विद्यालयी शिक्षा व्यवस्था एक नियत समय-सारिणी के साथ कक्षा प्रणाली की औपचारिक व्यवस्था में आमने-सामने की एक परम्परागत शिक्षा व्यवस्था है. जबकि मुक्त विद्यालयी शिक्षा शिक्षार्थी की स्व-अध्ययन एक सुविधाजनक विधि से कराने और उसकी तैयारी के अनुसार मूल्यांकन की पद्धति है. मुक्त शिक्षा प्रणाली उन शिक्षार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी है जो आर्थिक, सामाजिक या भौगोलिक कारणों से औपचारिक शिक्षा प्राप्त नहीं कर पाए हैं या किसी प्रकार का रोजगार करने के साथ-साथ शिक्षा भी प्राप्त करना चाहते है.

NIOS (नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ ओपन स्कूलिंग):

NIOS एक राष्ट्रीय बोर्ड है जो सीबीएसई और सीआईएससीई / आईसीएसई के समान ओपन स्कूलों की 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं का प्रबंधन करती है.

NIOS का उद्देश्य साक्षरता बढ़ाने और ग्रामीण क्षेत्रों को शिक्षा प्रदान करना है.

NIOS द्वारा प्रदान किए जाने वाले स्कूल स्तर के पाठ्यक्रम नीचे अंकित हैं:

BE ‘A’ Level course Equivalent to class 3rd
OBE ‘B’ Level course Equivalent to class 5th
OBE ‘C’ Level course Equivalent to class 8th
Secondary Course Equivalent to class 10th
Senior Secondary Course Equivalent to class 12th

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